यह गुरुद्वारा गोदावरी नदी के बायें किनारे पर स्थित है तथा तख्त सचखंड साहिब से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर है। एक दिन गुरु जी नदी के किनारे पर बैठे हुये थे। तभी एक श्रद्धालु गुरु जी के दर्शन करने के लिये वहां आया। उसने गुरु जी को एक बहुमूल्य नगीना भेंट किया। उस श्रद्धालु के मन में इस बात का गर्व था की उसने गुरु जी को कीमती भेंट दी है। अंतर्यामी सतगुरु जी ने उसका अहंकार मिटाने के लिये उसके देखते-देखते वह नगीना नदी मे फेंक दिया।
उस श्रद्धालु के अहं को इस घटना से बड़ी चोट लगी। उसने मन में सोचा की गुरु जी को कीमती रत्न की परख नही होगी इसीलिये उन्होने बहुमूल्य नगीना नदी में फेंक दिया है। गुरु जी ने उसकी निराशा दूर करने के लिये उसे नदी से वह नगीना निकाल लाने का आदेश दिया।
वह व्यक्ति गुरु जी का आदेश मानकर नदी की ओर बढ़ा। जब नदी के जल में उसकी नजर पड़ी तो उसे अनगिनत बहुमूल्य रत्न वहां पड़े हुये नजर आये। यह देखकर उसका अभिमान चूर-चूर हो गया। उसने गुरु जी से अपनी गलती के लिये माफी मांगी। इस घटना के कारण इस जगह का नाम नगीना घाट पड़ा। यहाँ एक आलीशान गुरुद्वारा संत बाबा शीशा सिंघ जी कार सेवा वालों ने बनवाया है। . |
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