Guru Gobind Singh Ji


यह पवित्र गुरुद्वारा शिकार घाट गुरुद्वारा से करीब डेढ़ मील की दूरी पर गोदावरी नदी के किनारे स्थित है। इस जगह का इतिहास भी गुरुद्वारा नगीना घाट के इतिहास की तरह ही है। एक दिन गुरु जी इस स्थान पर नदी के किनारे बैठे थे। हिंदुस्तान का मुगल शहंशाह बहादुर शाह भी गुरु जी के पास बैठा था। उसने गुरु जी को यहाँ एक बेशकीमती हीरा भेंट किया। उसके मन में कीमती भेंट करने का अभिमान था। महाराज ने उसके अभिमान को मिटाने के लिये उसके देखते-देखते हीरा नदी में फेंक दिया। शहंशाह के मन में रोष हुआ। उसने सोचा की गुरु जी को हीरें की परख नहीं है। .
गुरु जी ने बादशाह की निराशा दूर करने के लिये उसे नदी में झांकने के लिये कहा। जब शहंशाह ने नदी की ओर देखा तो उसे अनगिनत बेशकीमती हीरें नदी में पड़े नजर आये। उसका अहंकार चूर हो गया तथा उसने गुरु जी से अपनी गलत ख्याली के लिये माफी मांगी।.
नांदेड़ शहर के बारे में
  नांदेड़ पहुंचने के साधन  
  रेल समय सूची  
  अन्य गुरुद्वारे  
 
Gurudwara Hiraghat Sahib Ji
गुरुद्वारा हीरा घाट साहिब
       
       
       












Guru Nanak Dev Ji