Guru Gobind Singh Ji


यह गुरुद्वारा नगीना घाट गुरुद्वारे के नजदीक ही गोदावरी नदी के किनारे पर स्थित है। सिख पंथ के महान शासक बाबा गुरबख्श सिंघ जी बंदा बहादुर की याद में यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा संत बाबा शीशा सिंघ जी तथा संत बाबा जगतार सिंघ जी कार सेवा वालों ने बनवाया है।.
बाबा गुरबख्श सिंघ जी का बचपन का नाम लक्ष्मण दास था। वे राजपूत जाति के तथा जम्मु काश्मीर के पूंछ इलाका के राजौरी नामक गांव के निवासी थे। एक दिन आपने शिकार खेलते हुये एक गर्भवती हिरणी को मार डाला। उस हिरणी के गर्भ से दो बच्चे निकले जो उनके सामने तड़प-तड़प कर मर गये। इस ह्रदय विदारक दृश्य का आप के मन पर गहरा असर पड़ा। आप को वैराग्य ने घेर लिया तथा घर-द्वार छोड़ कर आप जंगलों में चले गये। भटकते-भटकते दक्षिण भारत में आप गुणीया नामक संत के शागिर्द बन गये। लगन पूर्वक उनकी सेवा करने के कारण आप को उन से जंतर-मंतर की विद्या प्राप्त हुयी। .
नांदेड़ शहर के बारे में
  नांदेड़ पहुंचने के साधन  
  रेल समय सूची  
  अन्य गुरुद्वारे  
 
Gurudwara Bandaghat Sahib Ji

गुरुद्वारा बंदा घाट साहिब

आप नांदेड़ आकर गोदावरी नदी के किनारे इस स्थान पर रहने लगे। प्राप्त की हुई शक्ति के बल पर आप आस-पास रहने वाले लोगों को तंग करने लगे। लोग आपकी शक्ति के कारण आपसे भयभीत होते। श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी महाराज एक दिन अपने सिखों सहित बैरागी के आश्रम में आ पधारे। गुरु जी बैरागी के पलंग पर विराजमान हो गये। उस समय बैरागी जी नदी के किनारे कहीं बैठे हुये थे।

उनके शिष्यों ने गुरु जी से संबंधित सारा समाचार उन्हें आ सुनाया। सुनकर वे बहुत क्रोधित हुये। आश्रम में आकर उन्होंने अपनी शक्तियों के बल पर पलंग को उलटाना चाहा। किंतु दो जहान के मालिक सतगुरु जी के सामने उनकी एक न चली। अंत में वे गुरु जी के चरणों में गिर पड़े तथा गुरु जी से विनती की, “ महाराज अपने बंदे को सही रास्ते पर डालें।“ गुरु जी ने प्रसन्न हो कर उन्हें अमृतपान करवा कर अपना सिंघ बना लिया तथा आपका नाम गुरबख्श सिंघ रखा।

कुछ समय पश्चात गुरु जी ने बाबा गुरबख्श सिंघ जी को पांच तीर, २५ सिंघ, निशान साहिब तथा नगारा देकर उन्हे जत्थेदार बनाकर पंजाब की ओर मुगलों के जुल्मी शासन का अंत करने के लिये भेज दिया। बाबा बंदा सिंघ जी ने कई वर्षों तक मुगलो को नाकों चने चबवाये। पंजाब के कई इलाके फतेह किये। सरहंद को विशेष रुप से तबाह किया। अंत में आप जीवित अवस्था में मुगलों के हाथ लग गये। दिल्ली में आपको दिल दहलाने वाली यातनायें देकर शहीद कर दिया गया।
       
       
       












Guru Nanak Dev Ji