Guru Gobind Singh Ji


यह गुरुद्वारा तख्त सचखंड साहिब से सात मील की दूरी पर एक पहाड़ी के उपर सुशोभित है। इस स्थान पर श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने मूला खत्री नामक सियालकोट के किसी समय के निवासी को मुक्ति प्रदान की थी, जो उस वक्त खरगोश की जून भुगत रहा था। भाई मूला खत्री श्री गुरु नानक देव जी का सिख था परंतु बाद में वह गुरु जी से विमुख हो गया था। गुरु जी ने उस की पत्नी को वचन दिया था कि वे अपने दसवें स्वरुप में मूले को मुक्त करेंगे। एक दिन श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी इस पहाड़ी की ओर सिंघों सहित शिकार खेल रहे थे, अचानक यह खरगोश गुरु जी के सामने निकल आया। गुरु जी ने उस का शिकार कर श्री गुरु नानक देव जी के वचन को सत्य साबित किया। .
इस खरगोश का शिकार करने के कारण गुरुद्वारा का नामकरण शिकार घाट किया गया। गुरुद्वारा साहिब की शानदार इमारत संत बाबा जीवन सिंघ जी तथा संत बाबा दलीप सिंघ जी ने सन १९७१ में बनवाई थी। इस ओर के ऐतिहासिक गुरुद्वारों को जोड़ने वाली लिंक रोड तथा गुरुद्वारा शिकार घाट के नजदीक गोदावरी नदी के उपर पुल का निर्माण भी इन संतों ने करवाया था। .
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Gurudwara Shikarghat Sahib Ji
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Guru Nanak Dev Ji