नांदेड़ जिला हिंदुस्तान के महाराष्ट्र प्रांत के दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित है तथा इधर यह महाराष्ट्र को आंध्रप्रदेश से अलग करता है। ऐसा विश्वास प्रचलित है कि ‘नांदेड़’ नाम श्री शिवजी महाराज के वाहन ‘नंदी’
के नाम पर पड़ा है जिस ने यहाँ गोदावरी नदी के तट पर तपस्या की थी। ‘नंदी’ का अपभ्रंश कालांतर में ‘नांदेड़’ हो गया। नांदेड़ का अपना ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनैतिक महत्व है। श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी महाराज ने सतयुग में इस स्थान पर तपस्या की थी। उन्होने अपने इस जन्म का अन्तिम समय भी यहीं व्यतीत किया
श्री गुरु नानक देव जी महाराज के पवित्र चरण भी यहाँ पड़े हैं। गौतम ऋषी का भी तप स्थान यहाँ मौजूद है तथा श्री हनुमान जी का जन्म स्थान भी यहीं पर शिकार घाट नामक स्थान पर है। यही वह पवित्र स्थान है जहाँ श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को हमेशा के लिये गुरु गद्दी सौपी थी। नांदेड़ के उत्तर में महाराष्ट्र का यवतमाळ जिला, दक्षिण पूर्व में लातूर जिला तथा उत्तर पश्चिम में परभणी जिला स्थित है। इसके पूर्व में तथा दक्षिण पूर्व में आंध्रप्रदेश के आदिलाबाद तथा निझामाबाद जिला लगते हैं। दक्षिण में कर्नाटक प्रांत का बिदर जिला लगता है। यहाँ की प्राकृतिक संरचना में पहाड़, पठार, उतार-चढाव, समतल भूमि तथा नदियां सम्मिलित हैं। भौतिक रुप में नांदेड़ जिला को मुख्यतः दो भागो में बॉटा जा सकता है। उत्तर तथा उत्तर पूर्व का पहाड़ी इलाका तथा निचला ढ़लताँ इलाका जो गोदावरी नदी के किनारों पर का हिस्सा है जिस में मांजरा, मन्याड़ तथा पैनगंगा का इलाका शामिल है।