यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा नांदेड़ में गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। खालसा पंथ के पांच तख्तों में से यह एक है। दसम गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंघ जी ने अपने अन्तिम कुछ दिन इस स्थान पर व्यतीत किये थे।
इसी स्थान पर सरहंद के नवाब वजीर खान के भेजे हुये दो पठान भाईयों ने गुरुजी पर कातिलाना हमला किया था तथा यही वह पवित्र स्थान है जहां गुरु जी ने देह धारी गुरु प्रथा को समाप्त करते हुये गुरुगद्दी भी गुरु ग्रंथ साहिब जी के सुपुर्द कर दी थी तथा खालसा पंथ को हुक्म किया था -
आज्ञा भई अकाल की तभी चलायो पंथ, सब सिक्खन को हुकुम है गुरु मान्यो ग्रंथ।। गुरु ग्रंथ जी मान्यो प्रकट गुरां की देह जो प्रभ को मिलबो चहै खोज शबद महि लेह।।


"आज्ञा भई अकाल की तभी चलायो पंथ, सब सिक्खन को हुकुम है गुरु मान्यो ग्रंथ।।
गुरु ग्रंथ जी मान्यो प्रकट गुरां की देह जो प्रभ को मिलबो चहै खोज शबद महि लेह।।"


७ अक्टूबर १७०८ ई. को इस स्थान से गुरु जी सचखंड की ओर प्रस्थान किये थे। तख्त साहिब की इमारत दो मंजिला है। इस का आंतरिक ढांचा अमृतसर के हरिमंदिर साहिब जैसा है। गुरुद्वारा साहिब की आंतरिक दीवारों पर अमृतसर के हरिमंदिर साहिब की तरह ही काम हुआ है। अंगीठा साहिब के ऊपर बने कमरे में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी तथा श्री दसम ग्रंथ जी के स्वरुप सुखासन उपरांत विराजमान होते हैं। इसी कमरे में ऐतिहासिक शस्त्रों को सजाकर रखा जाता है। इन शस्त्रों में गुरु जी से संबंधित एक सोने के मुठ वाली कटार, दो धनुष, ३५ तीर, एक रत्न जड़ीत ढाल तथा पांच सोने की तलवारें भी शामिल है।
तख्त साहिब की इमारत का निर्माण कार्य सबसे पहले महाराजा रणजीत सिंघ जी ने शुरु करवाया था जो १८३२ ई. से १८३७ ई. तक चलता रहा। महाराजा की मृत्योपरांत इसका निर्माण कार्य रोक दिया गया था। उनके बाद गुरुद्वारा साहिब की इमारत की सेवा कार सेवा वाले महापुरुष संत बाबा शीशा सिंघ जी के सहयोग से पूर्ण हुई है। कई हेक्टर क्षेत्र में फैले गुरुद्वारा कॉम्पलेक्स में तख्त साहिब की ईमारत के पास ही दो और गुरुद्बारे हैं। एक माई भाग कौर जी की याद में तथा दूसरा गुरु जी के पांच प्यारों में से भाई दया सिंघ जी तथा भाई धरम सिंघ जी का अंगीठा है। इसके अलावा कॉम्पलेक्स में करीब ३०० कमरे यात्रियों के ठहरने के लिये बने हुये हैं। एक कार्यालय ब्लॉक, एक प्रिंटींग प्रेस तथा एक गुरुमत टकसाल भी बनी हुई है। अंगीठा साहिब के ऊपर बने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के निवास स्थान तथा शस्त्रागार वाले कमरे के बाहर खुले स्थान में अमृत वेला से लेकर देर शाम तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया जाता है। यहीं पर दिन भर कथा-कीर्तन का प्रवाह भी चलता है। .

सन् २००८ ई. में खालसा पंथ बहुत ही धूम-धाम से उत्साह पूर्वक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का ३०० वां वर्ष गुरुता गद्दी का तथा श्री गुरु गोबिन्द सिंघ जी महाराज का ३०० वां वर्ष सचखंड गमन का मनायेगा। चूंकि यह दोनों पवित्र घटनायें नांदेड़ की पवित्र धरती पर घटित हुई थीं, अतः इस स्थान पर यह गुरुपर्व विशेष रुप से मनाये जायेंगे। लाखों की संख्या में सिख श्रद्धालुओं के इस अवसर पर नांदेड़ पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा हजारों की संख्या में अन्य धर्मावलम्बियों के भी मौके पर पहुंचने का अनुमान है।