यह गुरुद्वारा तख्त सचखंड साहिब जी से कोई तेरह किलोमीटर की दूरी पर रत्नागिरी की पहाड़ियों पर स्थित है। यह उसी रोड पर स्थित है जिस पर गुरुद्वारा नानकसर साहिब बना हुआ है। नानकसर साहिब से यह गुरुद्वारा कोई तीन किलोमीटर की दूरी पर है।
श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के सचखंड गमन करने के कारण खालसा पंथ में शोक की लहर दौड़ गई थी। लोगों को अपना जीवन उद्देश्य विहीन महसूस हो रहा था। गुरु जी ने उस समय इस स्थान पर रहने वाले एक संत को घोड़े तथा बाज सहित दर्शन दिये तथा उसे नांदेड़ मे शोक प्रकट कर रहे खालसा पंथ के पास संदेश देकर भेजा “ मैं हमेशा आपके साथ हूं आप फिक्र न करें।“ उन्होंने यह संदेश भी दिया कि सभी हरि कीर्तन करें तथा सतनाम का जाप करें।
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गुरु जी का संदेश लेकर वह संत तख्त सचखंड की और गया तथा पंथ को गुरु जी का संदेश दिया। लोगों ने जब अस्तबल में गुरु जी के घोड़े तथा बाज को गायब पाया तो उन्होंने संत की बातों पर यकीन कर लिया। इस स्थान पर गुरुद्वारा साहिब की सेवा संत बाबा निधान सिंघ जी ने करवाई थी। संत बाबा शीशा सिंघ जी ने इधर आठ किलोमीटर लंबी सिमेंट की सड़क बनवाई थी जो गुरुद्बारा नानकसर को तथा गुरुद्वारा रतनगढ़ को नांदेड़- मुंबई उच्चपथ से जोड़ती है। |
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खेत खलिहान |
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वर्तमान में इस सड़क के दोनों ओर गुरुद्वारा लंगर साहिब के नाम कई एकड़ उपजाऊ भूमि है। इस जमीन पर उपजाया जाने वाला अन्न तथा सब्जियां गुरु के लंगर में इस्तेमाल की जाती हैं। इस स्थान पर भी संगत के लिये २४ घंटे अटूट लंगर उपलब्ध रहता है। |
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माल डंगर |
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इस स्थान पर गुरुद्वारा साहिब के कई पालतु पशु भी हैं जिनके लिये चारा, पानी तथा पशु घर की उत्तम व्यवस्था की गई है। गाय-भैंस आदि के दूध को गुरुद्वारा लंगर साहिब में प्रयुक्त किया जाता है। |
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