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यह गुरुद्वारा मनमाड़ शहर में स्थित है। मनमाड़ मुंबई – दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर स्थित रेलवे का बड़ा जंक्शन है। पहले नांदेड़ की ओर जाने के लिये लोगों को यहाँ ट्रेन बदलनी पड़ती थी। श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी सतारा के किले से दो बंदी राजाओं को मुक्त करा कर अपने घोड़े की रकाबें उन्हे थमा वायु मार्ग से यहाँ लाये थे। राजाओं के नाम बालाराव तथा रुस्तमराव थे। उस वक्त इस जगह पर घना जंगल हुआ करता था। संत निधान सिंघ जी ने सर्वप्रथम घना जंगल साफ करवा कर इस स्थान पर गुरुद्वारा बनवाया। गुरुद्वारा साहिब के निर्माण के वक्त इस स्थान पर एक छिपी हुई बाऊली भी मिली जिसका जल स्वच्छ और मीठा था। इस छिपी हुई बाऊली के नाम पर इस गुरुद्वारा साहिब का नाम गुरुद्बारा गुपतसर रखा गया।
इस स्थान पर बाद में संत बाबा शीशा सिंघ जी ने आलीशान गुरुद्वारा बनवाया तथा संगत के ठहरने के लिये कई कमरे भी बनवाये हैं। लंगर भी निर्बाघ २४ घंटे संगत को उपलब्ध है।
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