Guru Gobind Singh Ji



Gurudwara Nanaksar There is a Ber tree where Guruji sat in devotion for Nine days and Nine hours.

गुरुद्वारा नानकसर साहिब
  गुरुद्वारा रतन गढ़ साहिब  
  गुरुद्वारा गुपतसर साहिब  
  गुरुद्वारा यादगार साहिबजादे, देगलूर  
  गुरुद्वारा भगत धन्ना जी  
  पंजाब के गुरुद्वारे  
 
Gurudwara Nanaksar
गुरुद्वारा नानकसर साहिब

यह पवित्र स्थान नांदेड़ शहर से बाहर गोदावरी नदी के दूसरी ओर तथा तख्त सचखंड साहिब से कोई दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान हमें श्री गुरु नानक देव जी महाराज की याद ताजा कराता है। बिदर की ओर जाते हुये सतगुरु जी इस स्थान पर करीब नौ दिन रुके थे। यहाँ एक ऐतिहासिक बेर का पेड़ है जिसके नीचे बैठ कर गुरु जी ईश्वर चिंतन में मग्न रहे थे। पानी की उन दिनों इस स्थान पर किल्लत हुआ करती थी। एक दिन भाई मरदाना जी ने गुरु जी से विनती की ‘‘महाराज मैं प्‍यासा हूं मुझे जल चाहिये।” गुरु जी ने भाई मरदाना जी से रबाब पर ईश्‍वर की स्‍तुति‍ की धुन छेड़ने के लिये कहा। गुरु जी के आदेश को मानकर जब भाई मरदाना जी ने रबाब बजानी शुरु की, उस समय इस स्थान पर ठंडे तथा मीठे जल की एक धारा फूट पड़ी। गुरु जी ने बताया की यह पवित्र धरती देवताओं से संबंधित है, इसी लिये यह जल इतना ठंडा तथा मीठा है।
Gurudwara Nanaksar
ऐतिहासिक बेर का वृक्ष

जब यह संवाद चल रहा था, उसी समय गुरु जी के पास एक कोढ़ी पहुंचा। उसने गुरु जी से कोढ़ के रोग से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। गुरु जी को उस पर तरस आ गया। आपने उस मरीज को वहां प्रकट हुई जलधारा में स्नान करने के लिये तथा उस जल को पीने के लिये कहा।
Gurudwara Nanaksar
पवित्र सरोवर

गुरु जी के हुकुम की तामील करने पर उस व्यक्ति को कोढ़ के कष्टदायक रोग से मुक्ति मिल गई। उस व्यक्ति ने फिर गुरु जी से वि‍नती की, ‘‘ महाराज इस जलधारा को पवित्र सरोवर के रुप में परिवर्तित होने का वरदान दें ताकि मेरे जैसे और भी पापी इस पवित्र जल में स्नान करके अपने दुख- दर्द से छुटकारा प्राप्त कर सकें। कहा जाता है कि गुरु जी ने उस की वि‍नती कबूल करके उस जलधारा को पवित्र सरोवर के रुप में परिवर्तित होने का वरदान दिया तथा कहा कि जो भी संतान विहीन या किसी भी रोग से पीड़ित श्रद्धा तथा विश्वास पूर्वक सरोवर में स्नान करेगा, उसकी आशा पूर्ण होगी।

Gurudwara Nanaksar
प्रकाश स्थान

सर्व प्रथम इस स्थान पर पवित्र सरोवर की खुदाई तथा निर्माण का काम शेरे-पंजाब महाराजा रणजीत सिंघ जी ने शुरु करवाया था। वर्तमान समय में इस की सेवा संत बाबा शीशा सिंघ जी ने पूर्ण करवाई है तथा एक आलीशान गुरुद्वारा भी श्री गुरु नानक देव जी की याद में बनवाया है। अब इस स्थान की सेवा संत बाबा नरिंदर सिंघ जी करवा रहे हैं। इस स्थान पर दिन भर यात्रियों के लिये लंगर भी उपलब्ध है।

 
 












Guru Nanak Dev Ji