Guru Gobind Singh Ji


साधारण शब्दों में ‘गुरु’ का अर्थ ‘उस्ताद’ होता है। सिख धर्म की स्थापना गुरु नानक देव जी महाराज ने की थी जो स्वयं हिंदु घर में जन्मे जाति के क्षत्रिय थे। सिख धर्म में गुरु शब्द के अर्थ व्यापक है। श्री गुरु नानक देव जी से लेकर श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी महाराज तक सिखों के दस गुरु हुये हैं जिनमें एक ही गुरु ज्योति क्रमशः प्रविष्ट होती रही तथा दस स्बरुपो में युक्ति भी एक ही थी। अर्थात शरीर तो देखने में दस हुये हैं लेकिन उनमें प्रकाश एक ही था। श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने अपने अंतिम समय में श्री गुरु नानक देव जी के मिशन को पूर्ण हुआ घोषित कर अपने बाद देहधारी गुरु प्रथा की जरुरत नही कह कर गुरु गद्दी हमेशा के लिये शब्द तथा ज्ञान के भंडार गुरु ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ को सौंप दी।
गुरुद्वारा लंगर साहिब जी
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Guru Nanak Dev Ji