गुरुद्वारा लंगर साहिब के अपने कुछ प्रकाशन भी हैं। इनमें निम्नलिखित पुस्तकें शामिल हैं।

हजुरी दीदारे



नांदेड़ तथा इसके आस-पास के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की जानकारी प्रदान करती यह सचित्र पुस्तक है। इसकी आवश्यक्ता लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। इस पुस्तक को पढ़कर यहां के गुरुद्वारों का इतिहास जाना जा सकता है।

रब्बी ज्योत

यह पुस्तक गुरुद्वारा लंगर साहिब को सिख जगत में प्रकट करने वाले महान संत, बाबा निधान सिंघ जी के जीवन पर आधारित है। इस पुस्तक को गुरुद्वारा लंगर साहिब ने प्रकाशित किया है। पहले उपरोक्त दोनो पुस्तकें अलग-अलग जिल्द में प्रकाशित की जाती थीं। लेकिन अब ये एक ही जिल्द में उपलब्ध हैं।

गुरमुख बचन
ईश्वर की प्राप्ति के लिये लालायित जिज्ञासुओं के लिये यह पुस्तक अच्छी मार्ग दर्शक है। यह संत बाबा गुरमुख सिंघ जी पटियाला वाले के अनुभव पर आधारित है। आप उच्च कोटी के सिख संत हुये हैं। कार सेवा के संस्थापक भी आप ही थे। उन्होंने यह पुस्तक मूल रुप में उर्दू भाषा में लिखी थी। बाद में बाबा गुरुबख्श सिंघ जी ने पंजाबी लिपि में इसका अनुवाद किया तथा गुरुद्वारा लंगर साहिब जी से इसे प्रकाशित किया गया।
नामदारू
इस पुस्तक में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के कुछ शब्द संकलित हैं जिनका नियमित पाठ करने से पाठक को शारीरिक तथा मानसिक संताप से मुक्ति मिलती है। पुस्तक में गुरुमंत्र ‘वाहिगुरु’ भी २५५१ बार दोहराया गया है।